बिना दरवाज़ा खटखटाए, जाग जाती हैं आपकी आवाज़, यादें और किस्से।
कभी किशोर कुमार की आवाज़ में,
तो कभी खामोशी भरी शाम में ।
किताब के पन्हो पर जैसे ही पड़ा अंधेरा,
गूंजी आपकी आवाज़ मन में।
भर दिया आपने दुनिया में ऐसा उजाला
कि डर ही गया अंधेरा।
आकाश में तारा हो,
या हमारे दिल में छिपी उदासी,
या हो आशा और प्रेम की लकीरें जो हमारे जीवन में तराशी ?
कभी नर्म, कभी सख़्त, संतुलन का हो अवतार।
किशोर हो आप हमारे. सदा बहार, सदा बहार!
इतनी अमर है आपकी ऊर्जा, जाकर भी हमसे दूर ना जा सके|
Gauri..I can feel him in these lines. Missing him 💔 .
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Such a heartfelt, warm expression of your love for dadu chapz ♥️ it’s beautiful
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